रमजान का महीना गुरुवार से शुरू हो गया है। इस बीच, उत्तर प्रदेश से मस्जिदों में लाउडस्पीकर को लेकर एक खबर सामने आई है। यूपी सरकार ने क्लीयर कर दिया है कि रमजान के दौरान मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
दरअसल, गुरुवार को समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप कमाल अख्तर ने ये मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है, इसलिए एक महीने के लिए मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने की परमीशन मिलनी चाहिए। कमाल अख्तर ने कहा कि अगर लाउडस्पीकर से सहरी और इफ्तार के टाइम का ऐलान किया जाएगा, तो रोज़े रखने वाले मुसलमानों को राहत मिलेगी।
हालांकि, प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस मांग सिरे से खारिज कर दी। सुरेश खन्ना ने कहा कि पहली बात तो ये कि लाउडस्पीकर पर बैन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगा है, इसलिए इसमें सरकार कुछ नहीं कर सकती। दूसरी बात ये है कि आजकल सबके पास मोबाइल है। सहरी और इफ्तार का वक्त भी पहले से तय होती है, इसलिए लोग मोबाइल में अलार्म लगा सकते हैं। इसके लिए लाउडस्पीकर की क्या जरूरत?
रमजान इस्लामी कैलेंडर का 9वां महीना है। रमजान महीने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'रोज़ा' है। मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी खाने या पीने से परहेज करते हैं। इसी महीने की एक रात (लैलातुल-क़द्र) में अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद (स.) पर कुरान को उतारने की शुरुआत की थी, इसलिए इस महीने में कुरान तिलावत अधिक किया जाता है।
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